*मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक जाम क्योँ हुआ और कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कैसे प्रतिक्रिया दी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक जाम क्योँ हुआ और कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कैसे प्रतिक्रिया दी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई


【मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई】यह घटना बुधवार 4 फरवरी 2026 को शुरू हुई। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 20 घंटे से ज़्यादा (कुछ रिपोर्टों के अनुसार 24 घंटे) तक ट्रैफिक रुका रहा। शाम लगभग 6:15 बजे खंडाला-भोर घाट सेक्शन (सुरंग के पास) के पास एक खड़ी ढलान पर LPG/प्रोपेन ले जा रहे एक गैस टैंकर का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गया। गैस फैलने और संभावित रिसाव को रोकने की ज़रूरत के कारण दोनों कैरिजवे बंद करने पड़े।  जाम का पैमाना देखे तो सैकड़ों प्राइवेट कारें, दोपहिया वाहन और ट्रक,कई प्राइवेट वाहनों के यात्रियों के अलावा लगभग 163 स्टेट ट्रांसपोर्ट (ST) बसें फंसी हुई थीं। महिलाएं,बच्चे और वरिष्ठ नागरिक कई घंटों तक बिना भोजन,पानी या शौचालय की सुविधा के फंसे रहे। आपातकालीन प्रतिक्रिया म़े NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) और SDRF (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की टीमें तैनात की गईं। गैस रिसाव को रोकने के लिए BPCL (भारत पेट्रोलियम) की टीमें पहुंचीं। सड़क साफ करने के उपकरण और टो-बैक का आखिरकार इस्तेमाल किया गया लेकिन प्रतिक्रिया को धीमा और खराब तालमेल वाला बताया गया। दौरान वर्षा गायकवाड़ का बयान आया। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद के तौर पर, वर्षा गायकवाड़ ने ट्विटर और मीडिया पर कहा कि ट्रैफिक मैनेजमेंट और आपातकालीन प्रतिक्रिया दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। इससे न सिर्फ समय बल्कि जान भी जा रही है। इस पूरी गड़बड़ी की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?उन्होंने बुनियादी ज़रूरतों के बिना फंसी महिलाओं और बच्चों की दुर्दशा को उजागर किया और फंसे हुए यात्रियों के लिए तत्काल राहत (भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता) की मांग की साथ मेंअन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आई। आदित्य ठाकरे (शिव सेना) ने भी सरकार की दखल न देने की नाकामी की निंदा की और अधिकारियों से पानी,खाना और सैनिटेशन देने की अपील की। कई स्थानीय नेताओं ने इस बात की जांच की मांग की कि एक्सप्रेसवे पर इमरजेंसी-रिस्पॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों नहीं था? (जैसे, कोई वॉटर-टैंकर स्टेशन नहीं, कोई ऑन-साइट मेडिकल पोस्ट नहीं)। इसका नतीजा देखें तो ट्रैफिक सामान्य होना । 5 फरवरी 2026 की शाम तक गैस लीक को कंट्रोल कर लिया गया । पलटे हुए टैंकर को हटा दिया गया और ट्रैफिक फिर से चलने लगा हालांकि, कई यात्रियों ने बताया कि सफाई और बचाव अभियान के दौरान जाम के ज़्यादातर समय उन्हें कोई मदद नहीं मिली।  इसकी मुख्य बातें देखें तो इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आ गई एक्सप्रेसवे हालांकि एक हाई-स्पीड कॉरिडोर है लेकिन पहाड़ी हिस्से में पर्याप्त इमरजेंसी-रिस्पॉन्स पॉइंट की कमी थी। इसी दौरान कोऑर्डिनेशन की समस्याएँ देखी। कई एजेंसियां ​​शामिल थीं लेकिन एक सिंगल कमांड सेंटर की कमी के कारण राहत में देरी हुई। राजनीतिक जवाबदेही को लेकर वर्षा गायकवाड़ की खुलकर आलोचना ने राज्य परिवहन और सड़क रखरखाव विभागों पर इमरजेंसी प्रोटोकॉल की समीक्षा करने और ऐसी घटनाओं के दौरान यात्रियों को बेहतर सहायता प्रदान करने के लिए दबाव डाला। यह घटना क्यों मायने रखती है? मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे रोज़ाना आने-जाने वालों,माल ढुलाई और पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है। 20 घंटे का ठहराव पूरे महाराष्ट्र और गुजरात में आर्थिक गतिविधि को बाधित करता है। इस घटना ने यह दिखाया कि कैसे एक सिंगल वाहन दुर्घटना (टैंकर) एक बड़ी मानवीय समस्या में बदल सकती है । जब आकस्मिक उपाय अपर्याप्त हों तब। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ जैसे नेताओं द्वारा बढ़ाई गई सार्वजनिक आलोचना से महाराष्ट्र सरकार पर इमरजेंसी-रिस्पॉन्स सुविधाओं (जैसे, वॉटर-टैंकर बे, मेडिकल कियोस्क) को अपग्रेड करने और घटना को संभालने के तरीके की औपचारिक जांच करने का दबाव पड़ने की संभावना है। संक्षेप में कहे तो एक गैस-टैंकर पलटने से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 20 घंटे से ज़्यादा का जाम लग गया। जिससे सैकड़ों यात्री फंस गए। वर्षा गायकवाड़ ने खराब ट्रैफिक मैनेजमेंट और इमरजेंसी रिस्पॉन्स की निंदा की और मांग की कि किसी को जवाबदेह ठहराया जाए और फंसे हुए यात्रियों को बेहतर सहायता प्रदान की जाए। इस घटना ने एक्सप्रेसवे पर बेहतर सुरक्षा और रिस्पॉन्स सिस्टम के लिए व्यापक आह्वान को जन्म दिया है।【Photo Courtesy Google】

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