ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने 1 मार्च 2 को की*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई
 की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने 1 मार्च 2 को की*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई





【मुंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई】ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरान मीडिया ने कर दी हैं। वह 86 वर्ष के थे और तेहरान में उनके कार्यालय पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए। उनके मौत के अंतर्गत राष्ट्रीय शोक का एलान हुआ है। ईरान सरकार ने उनकी मृत्यु के बाद 40 दिनों के राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। वह  साल1989 से ईरान के सर्वोच्च पद पर आसीन थे। उनकी मृत्यु के बाद राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक सदस्य वाली परिषद अस्थायी रूप से नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालेगी। उनकी मृत्यु के बाद ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं । जिससे क्षेत्रीय तनाव काफी बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्थिति देखे तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का एक बड़ा अवसर बताया हैं । जबकि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भी इस पर सख्त बयान दिए हैं। 


ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान संक्रमणकालीन दौर में प्रवेश कर रहा है। इस चरण का नेतृत्व राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और संरक्षक परिषद के एक न्यायविद करेंगे। इसके अतिरिक्त मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और सलाहकार अली शमखानी कथित तौर पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त अभियान में मारे गए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने “ट्रांज़िशनल पीरियड” के लिए लीडरशिप की आउटलाइन बताई हैं। घटना की वजह देखे तोसुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हैं। संवैधानिक आधार ईरान के संविधान का आर्टिकल 111 सुप्रीम लीडर की मौत या अक्षम होने पर एक टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल बनाने का आदेश देता है। काउंसिल की बनावट (जैसा कि IRNA और सरकारी टीवी ने बताया है)  बतौर प्रेसिडेंट अभी मसूद पेज़ेशकियन हैं। ज्यूडिशियरी के हेड ईरान के ज्यूडिशियल सिस्टम के चीफ जस्टिस। गार्जियन काउंसिल से एक सीनियर मौलवी/न्यायविद जिसे एक्सपीडिएंसी काउंसिल चुनती है। काउंसिल का मकसद देखे तो जब तक असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स द्वारा नया सुप्रीम लीडर नियुक्त नहीं किया जाता । तब तक सरकारी मामलों को मैनेज करना और गवर्नेंस की कंटिन्यूटी सुनिश्चित करना। इसकवरेज से खास बातें जाने तो ट्रांज़िशनल फ़ेज़ के दौरान काउंसिल सबसे बड़ी अथॉरिटी के तौर पर काम करेगी। इसके बनने का मकसद पावर वैक्यूम से बचना और स्टेबिलिटी बनाए रखना है। तीन सदस्यों वाली यह बॉडी संवैधानिक ज़रूरत को दिखाती है कि प्रेसिडेंट,ज्यूडिशियरी चीफ़ और एक गार्डियन काउंसिल ज्यूरिस्ट मिलकर ट्रांज़िशन की देखरेख करेंगे और जानकारी देखे तो ईरान का पॉलिटिकल सिस्टम सुप्रीम लीडर को धार्मिक और पॉलिटिकल अथॉरिटी दोनों में सबसे ऊपर रखता है। ट्रांज़िशन मैकेनिज़्म दशकों से संविधान में बताया गया है लेकिन अब तक इसे कभी एक्टिवेट नहीं किया गया। इन समाचारों के सोर्स देखे तो ईरानी स्टेट मीडिया रिपोर्ट्स (IRNA),गल्फ़ न्यूज़,वॉल स्ट्रीट जर्नल लाइव कवरेज और न्यूयॉर्क टाइम्स लाइव  अपडेट्स हैं।




ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियान को संकट के बीच नेतृत्व परिवर्तन का सामना करना पड़ रहा है। ईरान के 71 वर्षीय राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन को 2024 में सुधारों को लागू करने और अमेरिका के साथ संबंध स्थापित करने के लिए चुना गया था हालांकि उन्हें परमाणु समझौते को सुरक्षित करने और आर्थिक संकट को संभालने में काफी संघर्ष करना पड़ा हैं। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद पेज़ेश्कियन और अन्य नेता संक्रमणकालीन अवधि की देखरेख करेंगे। मसूद पेज़ेशकियन एक ईरानी डॉक्टर,एकेडमिक और पॉलिटिशियन हैं। उनका जन्म 29 अगस्त 1946 को ईरान के हमादान में हुआ था। अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंटरनल मेडिसिन में स्पेशलाइज़ेशन किया और बाद में तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज में प्रोफ़ेसर बन गए। पॉलिटिकल फील्ड में पेज़ेशकियन ने कई बड़े पद संभाले हैं । हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर बतौर (1997-2001) ईरान की हेल्थ पॉलिसी और मेडिकल एजुकेशन सिस्टम की देखरेख की। बतौर साइंस, रिसर्च और टेक्नोलॉजी मिनिस्टर (2001-2005) हायर एजुकेशन और साइंटिफिक रिसर्च इनिशिएटिव के लिए ज़िम्मेदार। पार्लियामेंट मेंबर ईरानी मजलिस (पार्लियामेंट) में हमादान और बहार चुनाव क्षेत्र को कई टर्म तक रिप्रेजेंट करने के लिए चुने गए, जहाँ वे हेल्थ, एजुकेशन और सोशल अफेयर्स कमेटियों में एक्टिव रहे हैं। वह ईरान के हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर में सुधारों की वकालत करने, मॉडर्नाइज़ेशन, एक्सेसिबिलिटी और साइंटिफिक एडवांसमेंट पर ज़ोर देने के लिए जाने जाते हैं। पेज़ेशकियन ने मेडिसिन के फील्ड में कई रिसर्च पेपर और किताबें भी लिखी हैं।


दौरान ट्रंप का एक बयान देखे तो उन्होंने कहा था कि हमें एक बहुत बड़ा निर्णय लेना है। हमारे पास एक ऐसा देश है जो 47 वर्षों से लोगों के पैर उड़ा रहा है, हाथ हटा रहा है, उनका चेहरा हटा रहा है। वे जहाजों को मार रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं। पिछले दो,तीन महीनों में 32,000 लोग मारे गए,प्रदर्शनकारियों... वे एक सौदा करना चाहते हैं लेकिन एक ऐसा सौदा करना होगा जो सार्थक हो। ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था। यह रिपोर्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई से जुड़ी घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। नीचे दी गई जानकारी हालिया खोज परिणामों पर आधारित है। ट्रंप का बयान ईरान पर 47 वर्षों से हिंसा का आरोप हैं। उन्होंने 32,000 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का दावा किया। परमाणु वार्ता ट्रंप ने बातचीत के तरीके को लेकर नाखुशी जताई थी। किसी भी समझौते को "सार्थक" बताया। सैन्य कार्रवाई US सेंट्रल कमांड ने ईरान पर हमलों का फुटेज जारी किया। जिसमें ड्रोन को निशाना बनाना शामिल। अभियान का नाम पेंटागन ने सैन्य अभियान को आधिकारिक नाम दिया "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी"। 'ऑफ रैम्प्स' का संकेत ट्रंप ने कहा कि वे सैन्य अभियान को जल्द समाप्त कर सकते हैं। राजनयिक समाधान के लिए अभी भी तैयार हैं। दौरान ट्रंप का बयान आया था और उन्होंने ईरान पर आरोप लगाएं थे और परमाणु वार्ता पर नाखुशी जताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सार्वजनिक संबोधन में ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन को एक "बहुत बड़ा निर्णय" लेना है और ईरान के साथ कोई भी सौदा "सार्थक" होना चाहिए । उनके ऐतिहासिक आरोप देखे तो ट्रंप ने ईरान पर 47 वर्षों से हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह लोगों के "पैर उड़ा रहा है, हाथ हटा रहा है" और जहाजों को निशाना बना रहा है । प्रदर्शनकारियों की मौत का दावा भी हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से यह दावा किया कि पिछले दो-तीन महीनों में ईरान में 32,000 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं  हालांकि यह आंकड़ा विवादित है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस आंकड़े को खारिज करते हुए कहा कि हालिया अशांति में 3,317 लोग मारे गए थे और उन्होंने अमेरिका से इस दावे के सबूत पेश करने को कहा है । दौरान वार्ता पर नाखुशी का कारण देखे तो ट्रंप ने जिनेवा में हुई परमाणु वार्ता के तीसरे दौर के संदर्भ में कहा कि वे ईरान के साथ बातचीत के तरीके से "खुश नहीं" हैं। उनका कहना था कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता और ऐसा लगता है कि वे वास्तव में कोई समझौता नहीं चाहते । यूएस सेंट्रल कमांड का फुटेज और सैन्य अभियान के तहत ट्रंप के बयानों के बीच यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ हमलों का फुटेज जारी किया है । जारी किया गया फुटेज भी शोशल मीडिया में आ गया है। CENTCOM द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए वीडियो में क्षेत्र में तैनात युद्धपोतों से दागी गई मिसाइलें, विमान वाहक पोत से उड़ान भरते लड़ाकू विमान और ईरानी ठिकानों पर सटीक हमले दिखाए गए हैं । फुटेज में जमीन पर मौजूद एक ईरानी ड्रोन को निशाना बनाते हुए भी दिखाया गया । सैटेलाइट इमेजरी में लक्ष्यों के हिट होने के बाद हुए विस्फोटों के निशान भी दिखाए गए हैं । अभियान का उद्देश्य देखे तो CENTCOM ने एक बयान में कहा कि ये हमले "ईरानी शासन से आसन्न खतरों को खत्म करके अमेरिकी लोगों की रक्षा करने" के उद्देश्य से किए गए हैं। पेंटागन ने इस सैन्य अभियान को आधिकारिक नाम दिया है  "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" । ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय प्रभाव को देखे तो इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी इजराइल और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए । बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया । इस बढ़ते संकट के मद्देनजर राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी अरब, कतार, यूएई के नेताओं और नाटो प्रमुख के साथ फोन पर बातचीत की। जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर सहयोग के प्रयासों का संकेत मिलता है ।'ऑफ रैम्प्स' और भविष्य की संभावनाएं देखे तो सैन्य कार्रवाई के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे अभी भी राजनयिक समाधान के लिए तैयार हैं और उनके पास इस अभियान से बाहर निकलने के कई रास्ते ("ऑफ रैम्प्स") हैं । अभियान की अवधि के बारे में जाने तो ट्रंप ने कहा कि वे या तो इस अभियान को "लंबा खींच सकते हैं और पूरे मामले को अपने कब्जे में ले सकते हैं" या इसे "दो या तीन दिनों में समाप्त" कर सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस हमले से उबरने में ईरान को "कई साल लग जाएंगे" । वार्ता की विफलता देखे तो ट्रंप ने सैन्य अभियान के लिए दो मुख्य कारण बताए हैं। जिनेवा वार्ता का विफल होना और ईरान का पिछला आचरण। उनका आरोप है कि ईरान पिछले साल इजराइल द्वारा नष्ट की गई अपनी कुछ परमाणु सुविधाओं का पुनर्निर्माण कर रहा था  हालांकि स्वतंत्र विश्लेषकों ने केवल निर्माण गतिविधियों की ओर इशारा किया, यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि ईरान ने परमाणु गतिविधि फिर से शुरू कर दी है । यह स्थिति अत्यंत गतिशील है और आने वाले दिनों में इसके और विकसित होने की संभावना है। कूटनीतिक प्रयास और सैन्य तैयारियां दोनों ही जारी हैं। जिससे भविष्य की दिशा अनिश्चित बनी हुई है।

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•#यूएस#ईरान#खामेनेई #मौत#इसराइल#यूद्ध#संक्रमणकालीन दौर# नए राष्ट्रपति#कूटनीतिक प्रयास

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