*ईरान-यूएस,इजरायल युद्ध:'ऑपरेशन फतेह खैबर' क्या है?जानें इसके ऐतिहासिक और धार्मिक मायने*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*ईरान-यूएस,इजरायल युद्ध:'ऑपरेशन फतेह खैबर' क्या है?जानें इसके ऐतिहासिक और धार्मिक मायने*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】ईरान पर अमेरिका- इज़रायल के हमले किएं । यूद्ध के हालात में ईरान ने अमेरिका-इज़रायल पर जवाबी हमले को दिया 'ऑपरेशन फतेह खैबर' नाम । ईरान ने अमेरिका और इज़रायल पर अपने जवाबी हमले को 'ऑपरेशन फतेह खैबर' नाम दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान अपने आक्रांताओं को पछताने पर मज़बूर करेगा। शनिवार को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया । जिसके जवाब में ईरान ने इज़रायल की ओर मिसाइलें दागीं और कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। देश अपनी रक्षा के लिए तैयार है ऐसा ईरान का विदेश मंत्रालय कहा। मध्य पूर्व में शनिवार 28 फरवरी 2026 को एक बार फिर जंग छिड़ गई ।

जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इस हमले का ईरान ने करारा जवाब दिया और अपनी इस जवाबी कार्रवाई को 'ऑपरेशन फतेह खैबर' Fateh-e-Khaibar नाम दिया । अमेरिका और इजरायल ने अपने संयुक्त अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अमेरिका और 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' इजरायल का नाम दिया हैं। जिसके तहत तेहरान, इस्फहान,क़ोम और चाबहार समेत कई ईरानी शहरों में धमाके सुने गए ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय और आवास को भी निशाना बनाया गया था हालांकि हमले के समय वह वहां मौजूद नहीं थे और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया । क्यों पड़ा इस यूद्ध में 'ऑपरेशन फतेह खैबर' नाम? युद्ध के मैदान में किसी भी सैन्य अभियान का नाम रखना एक रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक हथियार होता है। यह नाम सीधे तौर पर दुश्मन के मनोबल को तोड़ने और अपने समर्थकों में जोश भरने के लिए डिजाइन किए जाते हैं । 'ऑपरेशन फतेह खैबर' का सीधा संबंध 628 ईस्वी में हुए 'जंग-ए-खैबर' खैबर की लड़ाई से है। इस्लामिक इतिहास के अनुसार यह लड़ाई मदीना के पास खैबर के नखलिस्तान में रहने वाले यहूदी कबीलों और पैगंबर मुहम्मद के नेतृत्व में मुसलमानों के बीच लड़ी गई थी। इस युद्ध में मुसलमानों को यहूदी कबीलों के मजबूत किलों पर विजय प्राप्त हुई थी। जिसमें इमाम अली की वीरता की गाथाएं प्रसिद्ध हैं। इस नाम को चुनकर ईरान ने इजरायल जो खुद को यहूदी राज्य कहता है। उसको एक गहरा ऐतिहासिक और धार्मिक संदेश दिया है। यह संदेश है कि जिस तरह इतिहास में खैबर के किलों पर विजय प्राप्त हुई थी। उसी तरह आज का मुस्लिम ईरान भी अपने दुश्मनों को हराने में सक्षम है। यह नाम ईरान के समर्थकों और क्षेत्र में मौजूद शिया समुदायों में जोश भरने का काम कर रहा है। जाने की क्या है पूरा मामला? अमेरिका-इजरायल का ईरान पर संयूक़्त हमला। शनिवार सुबह अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ 'बड़े सैन्य अभियान' की शुरुआत की। इजरायली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने इसे "ईरान से खतरों को दूर करने" के लिए एक पूर्व-निवारक हमला बताया ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान को अंजाम देने की पुष्टि करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य "ईरानी शासन से अमेरिकी लोगों की रक्षा करना" और उसके मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना है। उन्होंने ईरान की जनता से अपील करते हुए कहा कि वे सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दें और सत्ता पर कब्जा कर लें । ईरान का जवाबी हमला यानि ऑपरेशन फतेह खैबर के तहत ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। 'ऑपरेशन फतेह खैबर' के तहत ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें और ड्रोन दागे थे। जिससे उत्तरी इजरायल में सायरन बज उठे । वहीं क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। किन किन क्षेत्र में व्यापक असर हुई हैं वो देखे तो यह संघर्ष सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा। ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले किए। बहरीन जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा मुख्यालय है। संयुक्त अरब अमीरात अबू धाबी, दुबई, कतर अल उदैद एयर बेस और कुवैत में विस्फोट सुने गए थे। कुवैत ने अमेरिकी कर्मियों वाले अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाने वाली मिसाइलों को मार गिराया था। इस यूद्ध में हताहत और नुकसान देखें तो ईरानी मीडिया के अनुसार दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में 40 लोगों की मौत की खबर है । ईरानी मिसाइलों में से एक दक्षिणी सीरिया के स्वेइदा शहर में एक इमारत पर गिरी थी। जिससे 4 लोगों की मौत हो गई । अबू धाबी में मिसाइल के मलबे से एक व्यक्ति की मौत हो गई । इराक के दक्षिण में हुए हमलों में दो लोग मारे गए थे ।

इस युद्ध के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया देखें तो सबसे पहले रूस ने क्या कहा? विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका-इजरायल के हमलों की निंदा करते हुए इसे "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" बताया । फ्रांस ने मांग की कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाई जाएं। फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास ने ईरान पर हमले की कड़ी निंदा की और इसे "पूरे क्षेत्र पर सीधा हमला" करार दिया था। इराक सरकार ने अपने यहां हमलों की निंदा की और किसी भी पक्ष को अपने क्षेत्र का इस्तेमाल संघर्ष के लिए करने से मना किया । यातायात और हवाई सेवाएं हुई बाधित। बढ़ते तनाव के मद्देनजर इजरायल, ईरान और कई अन्य देशों ने अपनी हवाई सीमाएं बंद कर दीं। एयर इंडिया,इंडिगो, ब्रिटिश एयरवेज और रूस सहित कई देशों ने मध्य पूर्व के लिए अपनी उड़ानें स्थगित या रद्द कर दीं । यह घटनाक्रम दर्शाता है कि मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध के ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा है, जिसके दूरगामी परिणाम वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं।【PhotosCourtesy Google】
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