*ओमाइक्रोन नहीं है कोरोना का पहला और आखिरी स्वरूप!*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*ओमाइक्रोन नहीं है कोरोना का पहला और आखिरी स्वरूप!*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】 धीरे-धीरे सब कुछ शांत हो रहा था फिर एक बार फिर कोविड का नया रूप देखने को मिला हैं । ओमाइक्रोन ने दुनिया भर में चिंता की लहर पैदा कर दी है। भारत में इसके फैलने की खबरें आ रही हैं। अब डॉक्टर इसके लिए क्या कहते हैं? वो जरा देखें तो-
*यह ओमाइक्रोन कहाँ से टपका? हम मुश्किल से ही कोरोना की पीड़ा से बच पाए हैं तो नया संस्करण क्यों?*
ओमाइक्रोन की उत्पत्ति प्रकृति के लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है। हम सभी जानते हैं कि केवल कोरोना वायरस ही अपना रूप बदलते हैं। परिवर्तन की यह प्रक्रिया जारी है। जिस तरह एक ही पेड़ पर उगने वाले सभी केले एक जैसे नहीं होते उसी तरह वायरस की संतान भी एक जैसी नहीं होती है। इसका आनुवंशिक श्रृंगार थोड़ा बदल जाता है। इस तरह के बदलाव के कारण अब तक हमने अल्फा,बीटा, गामा, कप्पा जैसे कोरोना के अलग-अलग रूप देखे हैं। इनमें से सबसे खराब डेल्टा रूप का कोरोना वायरस था। भारत में दूसरी विनाशकारी लहर इसी डेल्टा वायरस के कारण आई थी।
कोरोना वायरस के लेटेस्ट वर्जन ओमाइक्रोन को अब लिस्ट में शामिल कर लिया गया है।
*प्रकृति में एक नए प्रकार का वायरस कैसे बनता है?*
कोई अन्य वायरस किसी भी अन्य जीवित चीज की तरह स्वचालित रूप से दो और चार नहीं बन सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि वायरस के कणों में ऐसा करने की प्राकृतिक क्षमता नहीं होती है।वायरस को अपने आप बढ़ने के लिए कोशिका में घुसपैठ करनी पड़ती है। एक बार जब यह कोशिका में प्रवेश करता है तो यह उस कोशिका का राजा बन जाता है और कोशिका की जैव-मशीनरी का उपयोग करके यह अपने जैसे लाखों अन्य कणों का उत्पादन करता है। समझें कि जैसे फागोसाइटोसिस तेल में अवशोषित हो जाता है वैसे ही फालानक्स और वायरस जैव-मशीनरी का उपयोग करके अपने जैसे अन्य कणों के फालानक्स को हटा देता है।विषाणु की मूल आनुवंशिक संरचना की प्रतियां जैविक मशीनरी द्वारा बनाई जाती हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह कॉपी मूल वायरस के समान होती है लेकिन नई कॉपी बनाने की यह जटिल प्रक्रिया पूरी तरह से 'त्रुटिरोधी' नहीं होती है यानी यह कभी-कभी मूल से थोड़ी अलग तरह की कॉपी बन जाती है। इस नए प्रकार की कॉपी वायरस का एक नया प्रकार है जिसे नया वायरस कहा जाता है। इन नवगठित रूपों में से अधिकांश मूल वायरस के समान व्यवहार करते हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि वायरस के कण का महत्वपूर्ण अंग बदल जाता है और यह पूरे वायरस के व्यवहार और रोग के लक्षणों को बहुत बदल देता है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस में मानव कोशिका में प्रवेश करने के लिए *स्पाइक प्रोटीन* नामक एक कुंजी होती है । जिसकी सतह पर बड़ी संख्या होती है। इस कुंजी से ही वह मानव कोशिका में प्रवेश कर सकता है।
हम सभी जानते हैं कि इस कुंजी को बेअसर करने वाला रसायन टीकाकरण द्वारा निर्मित होता है इसीलिए टीकाकरण के 21 दिन बाद रक्त में एक ऐसा रसायन बनता है जिससे कोरोना वायरस का हमला विफल या कमजोर हो जाता है।
*अब सोचिये, अगर कोई नया वायरस आ जाए तो उसके स्पाइक प्रोटीन में घातक परिवर्तन हो तो क्या करें?*
जरा विश्वास करें ऐसे वायरस के खिलाफ टीके भी कम प्रभावी हो सकते हैं और मानव कोशिका में अधिक आसानी से प्रवेश करने में सक्षम हो सकते हैं। यह ओमाइक्रोन ऐसा कुछ नहीं करने में सक्षम है। शोध के अनुसार ओमाइक्रोन के स्पाइक प्रोटीन में 3 बदलाव पाए गए हैं! कहने का मतलब यह है कि जब तक वायरस फैलता रहेगा, मानव शरीर में नए वायरस बनते रहेंगे। जैसा कि पहले बताया गया है इस नए वायरस कण में कई प्रकार होंगे। ऐसे कई रूपों में से एक संस्करण अधिक घातक और अधिक प्रचलित हो सकता है।
*क्या इस नए वेरिएंट के बनने की प्रक्रिया का कोई अंत है?*
सैद्धांतिक रूप से यदि सभी लोगों को टीका लगाया जाता तो इन सभी लोगों को नए वायरस कण नहीं मिल पाते। यदि नए वायरस कण नहीं बनते हैं तो वायरस या उत्परिवर्तित वायरस कण नहीं बनेंगे लेकिन आप जानते हैं व्यवहार में यह लगभग असंभव है यानी मानव शरीर,जिसे वायरस विकसित करने के लिए टीका नहीं लगाया गया है मिलते रहेंगे और इसलिए नए वायरस कण बनते रहेंगे। वहीं नए वेरिएंट्स बनाने वाले हैं।
*आपका मतलब यह है कि प्रकृति में हमेशा नए रूप होते हैं, और जब कोई गंभीर बीमारी पैदा करने वाला रूप होता है तो हम वापस वहीं आ जाते हैं, क्या ऐसा है?*
हां,इसलिए इतने सारे वैज्ञानिक कहते हैं कि हमें कोरोना और उसके नए रूपों के साथ जीना सीखना होगा हालाँकि यह घटना प्रकृति में कोई नई घटना नहीं है। हम सभी जानते हैं कि फ्लू का वायरस हर साल अपना रूप बदलता है इसलिए फ्लू का टीका हर साल देना पड़ता है।
*क्या सबको हर साल कोरोना का टीका लगवाना होगा?*
फ्लु में प्राकृतिक परिवर्तन का एक अनूठा तरीका और पैटर्न है इसलिए हर साल इसके खिलाफ एंटीडोट बनाया जा सकता है। अभी तक कोरोना का ऐसा कोई पैर्टन सामने नहीं आया है। जैसे-जैसे साल बीतेंगे हम इसके बारे में और जानेंगे। यह कहने के लिए पर्याप्त है । हमें अभी भी इंतजार करना होगा और देखना होगा कि मौजूदा टीका नए संस्करण के खिलाफ कितना काम करता है।
*क्या भारत में कोरोना की तीसरी लहर ओमाइक्रोन की वजह से आएगी?*
हाँ, यह संभव है। हमें तीसरी लहर का सामना करना होगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भले ही व्यक्ति पुराने वायरस से संक्रमित हो फिर भी वह ओमाइक्रोन से संक्रमित हो सकता है।
जिन लोगों को टीका लगाया गया है,वे भी ओमाइक्रोन से संक्रमित हो सकते हैं। इस प्रकार प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मानव जाति के लिए ओमाइक्रोन 'एक नई चाल, एक नया कदम' हो सकता है।
*क्या फिर से लागू होगा लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंध?*
तीसरी लहर सचमुच आती है या नहीं और यह कितनी घातक है? यह सरकार तय कर सकती है इसलिए अब से डरने की जरूरत नहीं है।
*अगर तीसरी लहर ओमाइक्रोन की वजह से हो तो सरकार को क्या करना चाहिए?*
दूसरे शब्दों में हमने मृत्यु की परीक्षा देखी है। उस समय बेड और ऑक्सीजन की कमी से कई लोगों की मौत हो गई थी । अब सरकार को ऐसा होने से रोकने के लिए ऑक्सीजन, दवाओं और बेड सुविधाओं के बारे में ध्यान से सोचना होगा । विदेश से आने वाले लोगों के लिए भी अनिवार्य क्वारंटाइन की जरूरत है।
*क्या टीकाकरण में तेजी लाने की कोई आवश्यकता है?*
विशिष्ट आवश्यकता हैं। हम में से बहुत से लोग अब लापरवाह हैं। टीके लेने में कई लोग आलस करते हैं । कई लोगों ने तो पहली खुराक भी नहीं ली है। ओमिक्रॉन के खिलाफ वर्तमान टीका कितना प्रभावी है । इसकी जानकारी कुछ दिनों में उपलब्ध होगी लेकिन अभी के लिए ओमाइक्रोन के खिलाफ एकमात्र हथियार टीकाकरण है। हो सकता है कि वैक्सीन बीमारी को न रोके लेकिन यह गंभीर मामलों को रोकता है इसलिए सभी को टीकाकरण जरूर करवाना चाहिए।
*एक व्यक्ति के रूप में ओमाइक्रोन से बचने के लिए क्या किया जा सकता है?*
हमें खुद को और अपने परिवार को इससे तब तक बचाना है । जब तक हम यह नहीं जान लेते कि ओक्रोन ओमाइक्रोन के खिलाफ काम करता है या नहीं या जब तक इसके खिलाफ कोई नया टीका विकसित नहीं हो जाता। इसके लिए सबसे जरूरी है दो लोगों के बीच दूरी बनाए रखना। आप जितनी दूर रहकर बात करेंगे, एक-दूसरे की सांसे छोड़ने की संभावना उतनी ही कम होगी। वही एक और महत्वपूर्ण बात है। बंद जगहों से दूर रहें । अब फिर से सर्दी है इसलिए लोग ठंड से बचने के लिए हर जगह खिड़कियां बंद कर देंगे। इतनी सीमित जगह में जितनी अधिक भीड़ होगी जोखिम उतना ही अधिक होगा।
*टीवी और अखबारों में मास्क की खूब चर्चा होती है। आपने नकाब की बात तक नहीं की*
हां, क्योंकि मास्क भी जरूरी हैं लेकिन याद रखें कि मास्क आपको वायरस से सुरक्षा की गारंटी नहीं देते हैं क्योंकि कोई भी मास्क 100 प्रतिशत फिट नहीं बैठता। अनफ़िल्टर्ड हवा नाक के किनारे से प्रवेश करती है तो वहां से वायरस आसानी से शरीर में पहुंच सकता है। मास्क का मुख्य कार्य व्यक्ति को उन महीन कणों से बचाना है । जो बोलते समय लार के कणों में गहरे होते हैं यानी मास्क आपके सामने वाले की सुरक्षा करने के लिए है न कि मास्क पहनने वाले व्यक्ति की सुरक्षा के लिए है। ज्यादातर लोग बोलने या करने के लिए अपने मुखौटे उतार देते हैं। यह बहुत गलत तरीका है। मास्क की असली जरूरत बोलते समय होती है। ऐसी गलती कभी न करें।
*टेक केयर:*
Omicron जैसे और भी वेरिएंट होंगे। हम सभी को अपनी दूरी बनाए रखना, खुले में बात करना और सामने वाली व्यक्ति की सुरक्षा के लिए मास्क पहनना सीखना होगा। ऐसा डॉ. नेहल वैद्य ने आखिर में बताया था ।【Photo Courtesy Google】
★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Breaking News#MCP•From Metro City Post•#ओमाइक्रोन

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