'रुस्तम-ए-हिंद' हार गया ,दादू चौगुले का कोल्हापुर में निधन /रिपोर्ट स्पर्श देसाई
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मुंबई /रिपोर्ट स्पर्श देसाई
उन्होंने दादू चौगुले द्वारा दो बार राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक अर्जित किया था। उन्हें 'रुस्तम ए हिंद', 'महान भारत केसरी' जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था । भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद जीवन गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित किया था ।
दादू चौगुले ने 10 साल की उम्र में कोल्हापुर जिले के राधानगरी तालुका में अर्जुनवाड़ा के छोटे से गाँव में कुश्ती शुरू की थी । इस छोटे से पहलवान ने अपने समय में उस्ताद गणपतराव अंडालकर का मन जीत लिया था । दादू कुश्ती के गुर सिखाने के लिए अंदलकर ने कड़ी मेहनत की थी । तब वे पहलवान, बने थे । उन्हों ने उत्तर के गढ़ों के साथ संघर्ष करना शुरू किया था। दादू ने कई सम्मान जीते, जो उनके हकदार थे । पहलवान अंडालकर, बाल गायकवाड़ और बालू बीर की मंडली ने कोल्हापुर में और हर जगह धूम मचाई थी ।
राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने भारत का झंडा भी फहराया था । दादू चौगुले ने लाल मिट्टी के सामने गद्दे पर राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का झंडा भी फहराया था । उन्होंने साल 1979 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में 100 किलोग्राम कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था । इससे पहले वह कोल्हापुर के महान भारत केसरी, रुस्तम ए हिंद के पुरस्कार जित
लाए थे। इससे वे एक अच्छे पहलवान बन गए थे ।
हालाँकि वे कुछ वर्षों तक कुश्ती से दूर रहे, लेकिन बाद में उन्होंने कुश्ती के विकास में सक्रिय योगदान दिया था । वह वर्तमान में कोल्हापुर शहर और जिला प्रशिक्षण टीम के अध्यक्ष हैं। इसके माध्यम से, वह कुश्ती के प्रचार के लिए एक आयोजक के रूप में काम कर रहे थे । उन्होंने विशेष प्रयास से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई कुस्ती वीर तैयार किए थे ।
अखिल भारतीय कुश्ती परिषद, अच्छे संबंधों के साथ, कोल्हापुर से राष्ट्रीय स्तर पर कुस्ती को ले गये थे । उन्होंने अपने एक बच्चे ने एक अच्छा मल्ल बनाया था । अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उनके पुत्र विनोद हिंदकेसरी बने थे ।
रिपोर्ट : स्पर्श देसाई √• Breaking News #MCP• from ●√ ●Metro City Post●के लिए...

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